How was the king prevented and again from ascending the throne ?

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The king was stopped by one of the stone angels supporting the throne that he could not sit on that because his heart was not pure like the cowherd boy and stone angel flew away. The king tried again to ascend the throne but he was stopped by another angel and in the same way 24 angels stopped the king everytime and flew away. When the turn of last angel came, it also stopped the king saying that his heart was avaricious enough as he always tried to covet the kingdom of others. Saying this the last angel flew away into sky taking away the judgement seat also and since then it is not seen by any one.

स्थानीय राजा को न्याय सिंहासन पर बैठने से रोकते हुए पहली परी ने कहा कि आपका हृदय ग्वाला बालक जैसा शुद्ध नहीं और आसमान में उड़ गई। राजा ने जब दोबारा सिंहासन पर बैठने का प्रयत्न किया परन्तु इस बार दूसरी परी ने उसे सिंहासन पर बैठने से रोका और आसमान में उड़ गयी। इसी प्रकार एक के बाद एक 24 परियों ने राजा को सिंहासन पर बैठने से रोका और सभी आसमान में उड़ गयी जब अन्तिम परी का समय आया तो उसने यह कहते हुए राजा को सिंहासन पर बैठने से रोका कि आपके हृदय में दूसरे राज्यों को हड़पने का लालच है और सिंहासन सहित आसमान में उड़ गयी और इसके बाद न्याय सिंहासन को किसी ने नहीं देखा।

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